मैहर
एशिया के सबसे बड़े मैहर जिले में स्थित पोड़ी मत्स्य बीज सेंटर में इस वर्ष अच्छे परिणाम सामने हैं. कलेक्टर मैहर विदिशा मुखर्जी के निर्देशन में जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी में मछली बीज उत्पादन एवं वितरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है. जिसका असर इस बार देखने को मिला है और 53 लाख से अधिक मछली के बीज की बिक्री की गई है।
पोड़ी में अलग अलग प्रकार के मिलते हैं मत्स्य बीज
मैहर जिले के पोड़ी केंद्र पर इस वर्ष मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज (मिक्स फ्राई) का उत्पादन कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इन क्षेत्रों पर इस तरह के बीजों की बिक्री ज्यादा देखी जा रही है. जिसके फल स्वरूप आस पास के लोगों द्वारा इस प्रजाति की खेती ज्यादा की जाती है मैहर से लगे हुए कई जिलों में इसकी खेती चल रही है इसके साथ साथ उत्पादन भी चल रहा है।
2.50 करोड़ का लक्ष्य
पोड़ी में स्थित शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र में वर्ष 2026-27 के लिए 2.50 करोड़ मत्स्य बीज की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मत्स्य बीज की बिक्री अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ की गई है. अब तक लगभग 53 लाख 28 हजार मत्स्य बीज की बिक्री की जा चुकी है. विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य को मार्च 2027 तक शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाने की संभावना है. वर्ष 2025-26 में केंद्र को 2.25 करोड़ मत्स्य बीज बिक्री का लक्ष्य निर्धारित गया था।
सहायक संचालक मत्स्य तरुण कांत पटेल एवं सहायक मत्स्य अधिकारी स्वरांजन सिंह बघेल ने बताया कि, ''केंद्र पर तैयार किए जा रहे मिक्स फ्राई में मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज शामिल हैं. इन बीजों को निर्धारित शासकीय दर पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाता है. किसान इन मछली बीजों को खरीदकर अपने तालाबों एवं पोखरों में संचय करते हैं।
अलग-अलग जिले से कृषक पहुंच रहे मैहर
शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी की मछली बीज की मांग जिले के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों सागर, दमोह, पन्ना, रीवा, मऊगंज एवं जबलपुर तक है. यहां से मत्स्य पालक एवं खरीदार मछली बीज क्रय करने के लिए केंद्र पहुंच रहे हैं. जहां उन्हें बेहतर व्यवस्था के साथ मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. खरीदार द्वारा चालान के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाता है. बिक्री के समय मत्स्य बीज अंतरण प्रमाण-पत्र की पर्ची भी जारी की जाती है, जिसमें मछली बीज की प्रजाति, संख्या, निर्धारित दर एवं कुल राशि का विवरण दर्ज रहता है. इस व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य बीज के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है जिससे कि आसानी से किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध हो।
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