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रविवार, 23 अगस्त 2026
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डिजिटल पीडीएस से पारदर्शी हुआ राशन वितरण, योगी सरकार की पहल को मिली मजबूती

लखनऊ

सरकार की डिजिटल पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है। राशन वितरण व्यवस्था में लाभार्थियों की पहचान से लेकर दुकान के स्टॉक और वितरण तक की जानकारी ऑनलाइन दर्ज होने से पूरी प्रक्रिया की निगरानी आसान हुई है। इससे फर्जी लाभार्थियों और काल्पनिक वितरण जैसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद भी मिली है।

सरकारी व्यवस्था के तहत लाभार्थी की पहचान और उसके हिस्से के राशन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। राशन की दुकानों के स्टॉक तथा वितरण की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। इससे संबंधित विभागीय अधिकारियों को वितरण व्यवस्था की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है।

केवाईसी से लाभार्थियों का रिकॉर्ड हो रहा अपडेट

पीडीएस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए राशन कार्डों की केवाईसी भी कराई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 93.5 प्रतिशत राशन कार्डों की केवाईसी पूरी हो चुकी है। इससे लाभार्थियों के रिकॉर्ड को अपडेट करने और वास्तविक पात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। केवाईसी की प्रक्रिया के जरिए राशन कार्ड में दर्ज लाभार्थियों के विवरण को अधिक विश्वसनीय बनाया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ सही पात्र परिवारों तक पहुंचे और व्यवस्था में किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश कम हो।

99.99 प्रतिशत आधार फीडिंग, 99.98 प्रतिशत प्रमाणीकरण

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पीडीएस में 99.99 प्रतिशत आधार फीडिंग और 99.98 प्रतिशत आधार प्रमाणीकरण का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। आधार आधारित पहचान व्यवस्था ने राशन वितरण में लाभार्थियों की पहचान को और मजबूत आधार दिया है।सरकार की ओर से लगातार डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। राशन वितरण में ऑनलाइन रिकॉर्ड, आधार आधारित प्रमाणीकरण और केवाईसी जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इन व्यवस्थाओं से केवल पात्र लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचाने में मदद मिल रही है, बल्कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।

पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रहा पूरा हक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाते हुए पात्र लाभार्थियों को उनके हिस्से का राशन उपलब्ध कराना है। डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन निगरानी से राशन दुकानों के संचालन पर भी नजर रखी जा सकती है।

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