इस्लामाबाद
पाकिस्तानी नौसेना युद्धकाल में ही नहीं, शांतिकाल में भी पूरी दुनिया के लिए खतरा है। 2014 में तो पाकिस्तानी नौसेना के बागी अफसरों ने अल कायदा आतंकवादियों के साथ मिलकर परमाणु हथियारों से लैस एक युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश की थी। गनीमत रही कि उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई और बागी अफसर पकड़े गए। नहीं तो उनकी योजना युद्धपोत को अगवा कर उसमें तैनात मिसाइलों से अरब सागर में तैनात भारतीय और अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करने की थी। अगर ऐसा होता तो यह किसी बड़े युद्ध की शुरुआत हो सकती थी।
पीएनएस जुल्फिकार को अगवा करने की कहानी
पाकिस्तानी युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश 2014 में की गई थी। इस घटना का विस्तार से वर्णन स्टीव कोल की 2018 की बेस्टसेलर पुस्तक 'डायरेक्टोरेट एस' में किया गया है। इसकी योजना पाकिस्तानी नौसेना के दो कट्टरपंथी अधिकारी लेफ्टिनेंट जीशान रफीक और ओवैस जखरानी ने बनाई थी, हालांकि इसमें दर्जनों दूसरे अधिकारी और नौसैनिक शामिल थे। इन दोनों अधिकारियों का संबंध अल कायदा से था। उस समय पीएनएस जुल्फिकार पाकिस्तानी नौसेना का सबसे आधुनिक युद्धपोत था, जो चीन में निर्मित 3,144 टन वजनी चार टाइप एफ-22पी श्रेणी के फ्रिगेटों में से पहला था।
पीएनएस जुल्फिकार से अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की थी प्लानिंग
इन दोनों की योजना चालक दल और कप्तान को बंधक बनाकर युद्धपोत का अपहरण करना ही नहीं था। बल्कि, इन दोनों ने युद्धपोत पर तैनात मिसाइलों से हमला कर अमेरिकी नौसेना के जहाज को डुबानी की भी प्लानिंग की थी। इनके निशाने पर अमेरिकी युद्धपोत यूएसएनएस सप्लाई था, जो एक फार्स्ट कॉम्बेट सपोर्ट शिप है। इसका इस्तेमाल मिशन पर तैनात अमेरिकी नौसेना के दूसरे युद्धपोतों को ईंधन, हथियार और खाने की डिलीवरी करने के लिए किया जाता है। उस समय यह जहाज उत्तरी अरब सागर में तैनात था, जो अमेरिकी नौसेना के एक फ्रिगेट के लिए सप्लाई लेकर जा रहा था।
पीएनएस जुल्फिकार पर हथियारों की सप्लाई
बागी अधिकारियों ने पीएनएस जुल्फिकार पर कब्जे के लिए छोटे हथियार और ऑटोमेटिक रायफलों को बैग में भरकर पहले ही अंदर पहुंचा दिया था। उन्होंने मिसाइल रूम और ऑपरेशन रूम की डुप्लिकेट चाभी भी बनवा ली थी। उन्हें एक और कमजोरी का पता था कि पीएनएस ज़ुल्फिकार पर मौजूद तोप और C-802 मिसाइलों को जहाज के मुख्य ऑपरेशन रूम के बाहर से ही तैयार और लॉन्च किया जा सकता था। C-802 मिसाइलों को दूसरे डेक से तब तक संचालित किया जा सकता था जब तक कि मिसाइलों का आटोमेटिक सिस्टम बंद रहता था।
परमाणु हथियार से लैस था पीएनएस जुल्फिकार
पीएनएस जुल्फिकार कोई साधारण जहाज नहीं था। यह पाकिस्तान की नौसेना सामरिक बल कमान का हिस्सा था, जिसे 2012 में स्थापित किया गया था। उस समय पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार दागने में सक्षम कोई पनडुब्बी नहीं थी, लेकिन 19 और 21 दिसंबर 2012 को इस फ्रिगेट ने कथित तौर पर C-802 क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया। इन मिसाइलों में दो से चार किलोटन की क्षमता वाला छोटा परमाणु हथियार भी लगाया जा सकता था, जो 1945 में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की विस्फोटक क्षमता का लगभग 15 से 25 प्रतिशत था। हमले के लगभग छह सप्ताह बाद, भारत की खुफिया एजेंसी (R&AW) ने कराची से मिली जानकारी के आधार पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सूचित किया कि हमले के समय पीएनएस जुल्फिकार पर एक परमाणु हथियार मौजूद था
गोलीबारी में मारे गए मुख्य अपहरणकर्ता
6 सितंबर 2014 की सुबह कराची में, लेफ्टिनेंट रफीक और जखरानी पीएनएस जुल्फिकार पर सवार हुए। उनके कुछ साथी नौसैनिक वर्दी में एक छोटी नाव में बंदरगाह की ओर बढ़े। एक सतर्क संतरी ने उन्हें देख लिया और गोलीबारी शुरू हो गई। जब गोलीबारी रुकी, तो रफीक और जखरानी समेत तीन हमलावर मारे गए। उन्हें अपने हथियारों का इस्तेमाल करने या फ्रिगेट की तोपों से फायरिंग करने का मौका नहीं मिला।
5 पाकिस्तान नौसैनिको को मौत की सजा मिली
इस साजिश में शामिल पांच जीवित पाकिस्तानी नौसेना अधिकारियों को मार्च 2016 में एक गुप्त सैन्य मुकदमे के बाद नौसेना न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें सब-लेफ्टिनेंट हम्माद अहमद, इरफानुल्लाह, मोहम्मद हम्माद, अरसलान नज़ीर और हाशिम नसीर शामिल थे। 2024 में उनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी गई थी। उनके वर्तमान ठिकाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
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